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2928

श्रीः

टोडरानन्दभ्‌

श्रीमदकवरसाहिमधानामात्यशरीरोडरपलेरणया वाराणसेयपिदरसकाण्डः सभूय बिरवितम्‌। तस्यायं स्सोस्यम्‌, अवतारसौस्यमिति सौस्यदयालकः

प्रथमः खण्डः |

पाराणतेयदिगदुविश्वविधारयस्थैः मयूरभसमराप्यापफपदमधितिषठननिः संस्फरतप्राटृतपास्यादिभापाविभागप्रधानाध्यापयेः, पुण्यपरानीय- पाडियाबिामन्दिरस्थैः संस्छरतादिमापाणां मूनपूर्ै प्रधानाध्यापकः वैयोपादश्चीपरशरामदा्ममिः संपादितम्‌

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मट्राचरपाण्‌

रोडरर्वशादिषर्णनम्‌

भ्रव्थस्थप्रकरणानि

च्मटक्षणम्‌ £

सादिसर्मनिरूपणम्‌ १३

अतिसलगैनिरूपणम्‌ १९

(२) सवतारसौख्यम््‌ ९९-२८६

अवतारसामाम्यनिरूपणम्‌ १५,

मत्स्यावतार ७१

कूमौवतारः ५१

प्ाराहाचतारः ५७

सरसिहावतारः

वामनावतार ९५

परषुरामावतारः १०८

श्रीरामावतारः १२०

श्रीकूष्णावतारः १९५

बुद्धावतारः ३८

फट्क्यचतारः २८४

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घामनपुखण (दण्न%) क्लपस्थ आपपर) एदपपद्य ए१९३३, 00.

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घ्यक्रस्गमसमाप्य (पार मक्ष) 555 4) ५०४.

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““श्रीरोढरमछका पति “““देवज्ञानन्तपुतनीलकण्ठावर चिते 28 771 यत्पादाम्बुनमाध्वीकं संसेन्यावाप्तसन्मतिः। जयव्येष गुरुः साक्षादनन्तो भक्तपत्षटः (पण्दप्णौणय 10 एदऽप्ऽकवप्ाताङ)

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(णा प्त वप्तवेपठप्णय + जरड्रमोादककपोताङ2).

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१९५५, एवमावाचवणाच 1८5 25 वलम 147611९8१ धात ७९९

नवतः, व॑द

पण्डवा इदपपोध्ठिडपाता58, कुप्रयदञय पठठ 3 81700 एणी